Mahendragarh at A Glance     >>     Introduction
 
जिला महेन्द्रगढ़ : एक परिचय
 

कानौड़िया ब्राहम्णों द्वारा आबाद किए जाने कि वजह से महेंन्द्रगढ शहर पहले कानौड के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि बाबर के एक सेवक मलिक महदूद खान ने बसाया था। सत्रहवीं शताब्दी में मराठा शासक तांत्या टोपे ने यहा एक किले का निर्माण करवाया था। 1861 में पटियाला रियासत के शासक महाराज नरेन्द्र सिहं ने अपने पुत्र मोहिन्द्र सिहं के सम्मान में इस किले का नाम महेन्द्रगढ रख दिया था। इसी किले के नाम कि वजह से इस नगर को महेन्द्रगढ के नाम से जाना जाने लगा और नारनौल निजामत का नाम बदल कर महेन्द्रगढ निजामत रख दिया गया।

1948 में पटियाला रियासत की नारनौल तथा महेन्द्रगढ़ तहसीले, जींद रियासत की दादरी (चरखी दादरी) तहसील तथा नाभा रियासत की बावल निजामत का कुछ हिस्सा मिलाकर महेन्द्रगढ जिले का गठन किया गया तथा नारनौल को जिला मुख्यालय बनाया गया। उल्लेखनीय है कि महेन्द्रगढ जिला राज्य का एकमात्र ऐसा जिला है, जिसका जिला मुख्यालय जिले के नाम के अनुरूप न होकर नारनौल में स्थित है।

1948 में महेन्द्रगढ जिले के गठन के बाद से जिलो के पुर्नगठन व नये जिले बनने की वजह से महेन्द्रगढ की भौगोलिक सीमाओं में अनेक बार परिवर्तन किऐ गये हैं। 1989 में रेवाड़ी को नया जिला बनाने के बाद महेन्द्रगढ जिले की भौगोलिक सीमाओं में परिवर्तन हुआ है।




भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रफल तथा जनसंख्या
 
महेन्द्रगढ़ जिला हरियाणा राज्य के दक्षिण-पश्चिम छोर के अन्तिम सिरे पर स्थित हैं। इसकी पश्चिम-दक्षिण की सीमायें तथा पूर्वी सीमा का एक बड़ा भाग राजस्थान प्रदेश तथा पूर्वी सीमा का शेष भाग हरियाण के जिला रेवाड़ी व उत्तरी भाग भिवानी जिले के साथ लगती हैं।

इस जिले का कुल क्षेत्रफल 1939.6 वर्ग किलोमीटर हैं, जिसमें से 1916.9 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण तथा 22.7 वर्ग किलोमीटर शहरी क्षेत्र में आता है। इसमें नारनौल उप मण्डल का कुल क्षेत्रफल 952.9 वर्ग किलोमीटर तथा महेन्द्रगढ कनीना उपमण्डल का कुल क्षेत्रफल 986.7 वर्ग किलोमीटर है। जिले में उक्त तीन उपमण्डल के अतिरिक्त नारनौल, महेन्द्रगढ, अटेली, कनीना नांगल चौधरी पांच तहसील, सतनाली उप-तहसील तथा नारनौल, महेन्द्रगढ, अटेली, कनीना, नांगल चौधरी, सतनाली, निजामपुर सिहमा आठ विकास खण्ड सम्मलित हैं। महेन्द्रगढ जिले में गावों की संख्या 370 हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार महेन्द्रगढ जिले की जनसंख्या 9,21,680 हैं, जिसमे 4,86,553 पुरूष तथा 4,35,127 महिलाऐं शामिल हैं।

महेन्द्रगढ जिले का अधिकाशं क्षेत्र रेतीला व पहाड़ी होने की वजह से यहां की जलवायु शुष्क हैं। अतः यहां की जलवायु ग्रीष्म ऋतु में गर्म और शीत ऋतु में ठंडी होती हैं। राजस्थान की सीमा के साथ सटे होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में जिले में तेज हवाऐं व धूल भरी आंधियां आती हैं। वर्षा ऋतु के अतिरिक्त यहां शरद ऋतु में फरवरी व मार्च माह में भी कुछ वर्षा होती हैं।

 

जिला एक दृष्टि में
प्रशासनिक ढ़ांचा
उप मण्डल 3
तहसील 5
उप तहसील 1
विकास खण्ड़
गांव 370 
पंचायतें 344
 
क्षेत्रफल एवं जनसंख्या-2011
क्षेत्रफल 1938.46 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्या 9,21,680
पुरूष 4,86,553
महिला 4,35,127
ग्रामीण क्षेत्र में जनसंख्या -
शहरी क्षेत्र में जनसंख्या -
जिला में साक्षरता दर 80.8%
पुरूष 89.4%
महिलाएं 71.0%
 
विभिन्न जानकारी
उप अधिक्षक कार्यालय 2
पुलिस स्टेशन 7
ड़ाक घर 10
टेलीग्राफ आफिस 2
नगर परिषद 1
नगरपालिका 4
मार्किट कमेटी 4 
विधानसभा क्षेत्र 4 
लोकसभा क्षेत्र 1 
 
कृषि
खेती योग्य कुल भूमि 1,58,695 हैक्टेयर
 
स्वास्थ्य
महेन्द्रगढ़ जिले में जनसाधारण को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला मुख्यालय नारनौल में एक सामान्य अस्पताल तथा 3 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कनीना, अटेली व महेन्द्रगढ में कार्यरत हैं। जिला मुख्यालय नारनौल में क्षय रोग की चिकित्सा के लिए एक जिला क्षय रोग केन्द्र कार्यरत हैं।
 
बाल कल्याण परिषद्
1.
  बाल भवन, नारनौल:- जिला बाल कल्याण परिषद, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में बच्चो के विकास हेतू निम्न कार्यक्रम चलाये जा रहे है।
                                                                                                              (गतिविधि रिपोर्ट वर्ष 2016-17)
जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा शहर नारनौल में नशा मुक्ति केन्द्र, ओपन शैल्टर होम, परिवार परामर्श केन्द्र आदि चलाए जा रहे है। इसके अतिरिक्त परिषद् द्वारा बच्चो के विकास हेतू जिले में 3 बाल भवन (नारनौल, महेन्द्रगढ  व अटेली) में चलाए जा रहे है जिनमें बच्चों के लिए डे-केयर सैन्टर, कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र, सिलाई कटाई प्रशिक्षण केन्द्र, कढाई प्रशिक्षण केन्द्र, केष एवं त्वचा केयर प्रशिक्षण केन्द्र, ई-लाईब्रेरी व डिजिटल लैंग्वेज लैब, बाल पुस्तकालय, तीरन्दाजी प्रशिक्षण केन्द्र, जूडो कराटे प्रशिक्षण केन्द्र आदि चलाए जा रहे है। परिषद् द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों का सक्षिंप्त विवरण निम्न प्रकार से है।
 
1) नशा मुक्ति एवं पूर्नवास केन्द्र :- जिला बाल कल्याण परिषदृ, नारनौल द्वारा शहर नारनौल मे एक नशामुक्ति केन्द्र चलाया जा रहा है जिसमें नशे के आदि को नशे की आदत छुड़वाने लिए नि:शुल्क दवाईया, डाक्टरी सलाह आदि प्रदान की जाती है। जो लोग अफीम, गांजा, चरस, स्मैक, भांग व शराब आदि का सेवन करते है। उनको विशेषज्ञो, डाक्टरो एंव सलाहकारो द्वारा मुफ्त ईलाज किया जाता है। गंभीर रूप से नशा पीडित को नि:शुल्क दाखिला करने की सुविधा उपलब्ध है जिसमे नि:शुल्क दवाईया व देख-रेख की जाती है। तथा हर वर्ष 26 जून को नशा मुक्ति दिवस  मनाया जाता है। वर्ष 2016-17 में कुल मरिज 899 आए जिसमें 215 मरीजो ने दाखिल  होकर  ईलाज करवाया व 684 मरिजो ने बाहय् तौर/बिना दाखिला लिये ईलाज करवाया। इस वर्ष 2016-17 में लोगो को नशे से दूर रहने के लिए 38 बार जागरूकता कैम्प लगाया गया।
 
2) ओपन शैल्टर होमः- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से बाल भवन नारनौल में ओपन शैल्टर होम चलाया जा रहा है जिसमें गरीब, मजदूर व कार्य करने वालो के बच्चें को पोषाहार, खेलकूद व प्रारम्भिक शिक्षा निःशुल्क दिया जाता है। वर्ष 2016-17 में इस केन्द्र में 25 से 27 बच्चों ने दाखिला लिया हुआ है जिनमे से 6 बच्चों को आगामी शिक्षा के लिए सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया गया। इस वर्ष श्रीमती अतिका कौशिक, चेयरपर्सन, जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा दिनांक 27-10-2016 को ओपन शैल्टर होम के तहत  हूड्डा सामुदायिक  केन्द्र नारनौल के नजदीक स्थित झुग्गी झोपड़ियों में लगाई जा रही कक्षा के 30 बच्चों के साथ दिवाली का पर्व मनाया जिसमें माननीय चेयरपर्सन ने अपने निजी खर्चे पर इस केन्द्र के 30 बच्चों को मिठाई व स्टेशनरी सामान जैसे स्कूल बैग, कापी, किताबे, लेखन सामग्री आदि वितरित की व दिवाली की शुभाकामना दी। इसके अतिरिक्त इस केन्द्र द्वारा समय-2 पर मुख्य/राष्ट्रीय त्यौहारो जैसे स्वतन्त्रता दिवस, होली, गणतंत्र दिवस, दिवाली, तीज, क्रिसमस डे, लोहड़ी, मकर संक्राती आदि इस केन्द्र के गरीब बच्चों के साथ मनाया गया। इस केन्द्र द्वारा बच्चों के लिए समय-2 पर सांस्कृति कार्यक्रम जैसे बाल दिवस, खेल प्रतियोगिता आदि का भी आयोजन किया गया। ओपन शैल्टर होम द्वारा हरियाणा सरकार द्वारा चलाए जा रहे ओपरेशन  मुस्कान के अन्तर्गत परिवार से बिछुड़े हुए बच्चों को इस केन्द्र में रखा जाता है जिसके अन्तर्गत इस वर्ष 6 गुमशुदा बच्चों को उनके परिवार वालो से मिलवाया जिनमें 4 लड़की व 2 लड़के शामिल है। इन गुमशुदा बच्चों में एक बच्चा गुंगा व बहरा था। ये सभी बच्चे 6 वर्ष से 15 वर्ष तक आयु के थे तथा इस केन्द्र द्वारा समय-2 पर गरीब, मजदूर व कार्य करने वालो के बच्चों को शिक्षा प्रति जागरूक करने के लिए शहर के अलग-2 स्थानो पर जागरूकता कैम्प लगाया गया।                     जारी पृष्ठ-2                           
2.
परिवार परामर्श केन्द्र:- जिला बाल कल्याण परिषदृ, नारनौल द्वारा शहर नारनौल मे एक परिवार परामर्श केन्द्र चलाया जा रहा है जिसमें आपस में पारिवारिक झगड़े मनोविज्ञानिक द्वारा सुलझाये जाते है।जिसमें इस वर्ष 2016-17 मे 135 केसो का रजिस्ट्रैशन हुआ जिनमें से 103 केसो का महिला एवं पुरूष परामर्शदाताओ द्वारा परामर्श दिया गया। इस वर्ष परिवार परामर्श केन्द्र द्वारा विभिन्न स्थानो पर 12 जागरूकता शिविर लगाए गए।
 
3.
बाल भवन, नारनौल:- जिला बाल कल्याण परिषद, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में बच्चो के विकास हेतू निम्न कार्यक्रम चलाये जा रहे है।
  1. डे केयर सैन्टर:- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में छोटे बच्चों के लिए डे केयर सैन्टर भी शुरू किया हुआ है जिसमें गरीब, मजदूर व कार्य करने वालो के बच्चें लाभ उठा रहे है जिन्हे पोषाहार, खेलकूद व शिक्षा निःशुल्क दिया जाता है। उक्त प्रोजेक्ट में इस वर्ष प्रतिदिन 15 बच्चों ने लाभ उठाया।
     
  2. कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र:- जिला बाल कल्याण परिषदृ, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में बच्चो के विकास हेतू एक बाल पुस्तकालय चलाया जा रहा है।  जिसमें वर्ष 2016-17 में प्रतिदिन लगभग 55 बच्चों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  3. केश एंव त्वचा प्रशिक्षण केन्द्र:- जिला बाल कल्याण परिषदृ, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में लड़कियो व महिलाओं के लिए एक केश एंव त्वचा प्रशिक्षण केन्द्र चलाया जा रहा है।इस केन्द्र में इस वर्ष प्रतिदिन लगभग 25 लड़कियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  4. सिलाई कटाई प्रशिक्षण केन्द्र:- जिला बाल कल्याण परिषदृ, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में जरूरतमंद  लड़कियो के लिए एक सिलाई व कढाई प्रशिक्षण केन्द्र चलाया जा रहा है। जिसमें इस वर्ष प्रतिदिन लगभग 25 लड़कियो ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  5. कढाई प्रशिक्षण केन्द्र:- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में जरूरतमंद लड़कियो व महिलाओं के लिए एक कढाई प्रशिक्षण केन्द्र भी चलाया जा रहा है जिसमें इस वर्ष प्रतिदिन 10 लड़कियो ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  6. तीरन्दाजी प्रशिक्षण:- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में बच्चो को तीरन्दाजी का प्रशिक्षण दिया जाता है जिसमें इस वर्ष प्रतिदिन 29 बच्चो ने दाखिला लेकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस वर्ष 2016-17 में बाल भवन तीरन्दाजी प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा विभिन्न उपलब्धियाँ प्राप्त की जिनका विवरण निम्न प्रकार से है।
    1. वर्ष 2016-17 में जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल के द्वारा बाल भवन नारनौल में चलाए जा रहे तीरन्दाजी प्रशिक्षण केन्द्र के खिलाड़ियो ने दिनांक 15-10-2016 से 16-10-2016 तक प्रथम महर्षि बाल्मीकी राज्य स्तरीय नगद राशि तीर-कमान प्रतियोगिता जो फरीदाबाद में आयोजित की गई, भाग लिया तथा इस केन्द्र के 4 खिलाड़ियो क्रमशः सोमेश शर्मा, दीपक सैनी, राहुल सैनी व नवीन सैनी ने मु0 2,50,000/-रू0 की नगद ईनाम राशि प्राप्त करके जिले व राज्य का नाम रोशन किया।
    2. इसी वर्ष 2016-17 में बाल भवन तीरन्दाजी प्रशिक्षण केन्द्र नारनौल द्वारा दो दिवसीय जिला स्तरीय तीर-कमान प्रतियोगिता का आयोजन  दिनांक 24-10-2016 से 25-10-2016 तक करवाया गया जिसमे जिले भर के तीरन्दाजी खिलाड़ियो ने बढ चढ कर भाग लिया।
    3. इसी वर्ष 2016-17 में बाल भवन तीरन्दाजी प्रशिक्षण केन्द्र नारनौल के खिलाड़ियो ने दिनांक 17-11-2016 से 20-11-2016  तक 36वी हरियाणा राज्य पुरूष तीर-कमान प्रतियोगिता रेवाड़ी में भाग लिया। इस प्रतियोगिता में पूरे हरियाणा राज्य के 300 तीन्दाजी खिलाड़ियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में महेन्द्रगढ जिले के बाल भवन तीरन्दाजी प्रशिक्षण केन्द्र नारनौल के खिलाड़ियो ने 18 पदक प्राप्त करके अपने जिले का नाम रोशन किया।
    जारी पृष्ठ-3
    4. इसी वर्ष 2016-17 में बाल भवन तीरन्दाजी प्रशिक्षण केन्द्र नारनौल के 1 खिलाडी हिमांशु लखेरा ने दिनांक 26-03-2017 से 30-03-2017 तक 37वी सिनीयर पुरूष व महिला कम्पाउंड व रिकर्व राष्ट्रीय स्तरीय तीर-कमान प्रतियोगिता फरीदाबाद में भाग लिया तथा कम्पाउंड राउंड में 152 खिलाड़ियो से मुकाबला किया व कांस्य पदक प्राप्त कर अपने जिले व हरियाणा राज्य का नाम रोशन किया। जिसमें प्रतिदिन 25 बच्चे लाभ उठाते है।
  7. जुडो कराटे प्रशिक्षण:- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में बच्चो को जुडो कराटे का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसमें इस वर्ष प्रतिदिन लगभग 22 बच्चों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस केन्द्र में 5 वर्ष से 12 वर्ष तक के बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
  8. रूचीकर कक्षाऐ :- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन नारनौल में हर वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चो के लिए रूचीकर कक्षाऐं भी चलाई जाती है जिसमें ड्राईंग, म्यूजिक, डांस आदि की कक्षाऐं लगाई जाती है जिसमें प्रतिदिन लगभग 100 बच्चें लाभ उठाते है जिनका विवरण निम्न प्रकार से है।
    a) डांस एंव म्यूजिक प्रशिक्षण:- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बाल भवन नारनौल में सांय 4 से 6 बजे तक 16 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों के लिए डांस एवं म्यूजिक की कक्षाए चलाई जाती है जिसमें प्रतिदिन लगभग 25 बच्चें लाभ उठाते है।
    b) ड्राइंग प्रशिक्षण केन्द्र :- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बाल भवन नारनौल में सांय 4 से 6 बजे तक 16 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों के लिए डांस एवं म्यूजिक की कक्षाए चलाई जाती है जिसमें प्रतिदिन लगभग 25 बच्चें लाभ उठाते है।
    c) ई-लाईब्रेरी व डिजिटल लैंग्वेज लैबः- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा शहरी एंव ग्रामीण बच्चों के लिए बाल भवन नारनौल में डिजिटल लैंग्वेज लैब व ई-लाईब्रेरी प्रोजेक्ट शुरू किया हुआ है। इस वर्ष लगभग 1000 बच्चो ने लाभ उठाया। इसके अलावा यहा पर लोगो की सुविधा के लिए आधार कार्ड में त्रुटिया ठीक करने का कार्य किया जा रहा है। इस वर्ष लगभग 2298. लोगो की त्रुटिया ठीक करवाई गई।
4.
बाल भवन, महेन्द्रगढ:- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा शहर महेन्द्रगढ मे भी एक बाल भवन चलाया जा रहा है जिसमें शहरी एंव ग्रामीण बच्चो के विकास हेतू निम्नलिखित गतिविधियाँ  चलाई जा रही है।द्वारा शहर महेन्द्रगढ मे भी बाल भवन चलाया जा रहा है। जिसमें शहरी एंव ग्रामीण बच्चो के विकास हेतू निम्न कार्यक्रम चलाये जा रहे है।
 
  1. शिशु बाल केन्द्रः- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन महेन्द्रगढ में 1 शिशु बाल केन्द्र चलाया जा रहा है। इन केन्द्र मे 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को पोषाहार, पूरक शिक्षा निःशुल्क प्रदान की जाती है। इस वर्ष इस केन्द्र में प्रतिदिन 15 बच्चों ने लाभ उठाया।
  2. बाल पुस्तकालय:- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन महेन्द्रगढ में बच्चो के विकास हेतू एक बाल पुस्तकालय चलाया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन 25  बच्चे लाभ उठाते है।
  3. केश एंव त्वचा प्रशिक्षण केन्द्र:- जिला बाल कल्याण परिषदृ, नारनौल द्वारा बाल भवन महेन्द्रगढ में लड़कियो व महिलाओं के लिए एक केश एंव त्वचा प्रशिक्षण केन्द्र चलाया जा रहा है। जिसमें इस वर्ष प्रतिदिन लगभग 30 लड़कियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  4. सिलाई व कटाई प्रशिक्षण केन्द्र:- जिला बाल कल्याण परिषदृ, नारनौल द्वारा बाल भवन महेन्द्रगढ में जरूरतमंद लड़कियो व महिलाओं के लिए एक सिलाई व कटाई प्रशिक्षण केन्द्र चलाया जा रहा है। जिसमें इस वर्ष प्रतिदिन लगभग  25 लड़कियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
     
5.
 सफाई पखवाड़ा-2016 :- जिला बाल कल्याण परिषद्, नारनौल द्वारा बाल भवन , परिवार परामर्श केन्द्र,ओपन शैल्टर होम के स्टाफ व अन्य गतिविधियों में आने वाले छात्र-छात्राओ द्वारा दिनांक 06.03.2017 व 07.03.2017 को स्वच्छता अभियान मनाया गया व उन्हें सफाई अभियान के तहत शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 250 छात्र-छात्राओ ने भाग लिया।
6.
साईंस म्यूजियम:- जिला बाल कल्याण परिषद बाल भवन, नारनौल में बच्चों के लिए एक साईंस म्यूजियम तैयार किया गया है जिसका उदघाटन डा0 साकेत कुमार, उपायुक्त एंव अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण परिषद, नारनौल द्वारा दिनांक 18-04-2012 को किया गया था। यह साईंस म्यूजियम जिलेभर पहला म्यूजियम है जिससे बच्चों की साईंस के प्रति जागरूकता पैदा होगी और वे नये अविष्कार के बारें में सोचेगें।
 
नारनौल के ऐतिहासिक स्थल
 
 
नारनौल शहर मे प्रमुख 14 ऐतिहासिक स्थल है, जिसमे से तीन स्मारक केन्द्रीय पुरातत्व विभाग और ग्यारह हरियाणा राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित हैं। यहां इब्राहिम खान सूरी का मकबरा , शेख मींहरा का दरगाह, शाह विलायत का मकबरा, मुकन्द दास की सराय, पाबिंया मस्जिद, तखतवाली बावड़ी, शाह कुली खान का मकबरा, हरगोपाल तालाब, शाह कुली खान का जलमहल, पल्तियां की मस्जिद और राय मुकन्द का छत्ता अथवा बीरबल का छत्ता तथा कुछ मन्दिर हैं।
 
जलमहल
ऐतिहासिक स्मारक जल महल शहर के दक्षिण मे आबादी से बाहर स्थित है। इसका निमार्ण 1591 में नारनौल के जागीरदार शाह कुली खान ने करवाया था। इतिहास प्रसिद्ध पानीपत के द्वितीय युद्ध में शाह कुली खान ने हेमू को पकड़ा था। उसी उपलब्धी में अकबर ने खुश होकर शाह कुली खान को नारनौल की जागीर सौंपी थी। जलमहल का निमार्ण लगभग 11 एकड के विशाल भूखण्ड पर किया गया हैं। यह विशाल तालाब के बीच में स्थित है, लेकिन स्मारक तक पहुचने के लिए पुल बना हुआ है। विशाल तालाब के बीच एक छोटे महल के आकार के इस सुन्दर भवन के निमार्ण में चूने व पत्थर का प्रयोग किया गया है। लगभग 400 वर्ष के अन्तराल में यह तालाब मिटटी से भर गया था। सन्‌ 1993 में जिला प्रशासन ने जलमहल के तालाब से मिट्‌टी निकालने का कार्य आरम्भ किया और अब इसकी मिट्‌टी निकाली जा चुकी है।
 
राय मुकन्द दास का छत्ता (बीरबल का छत्ता)
 
नारनौल की सघन आबादी के बीच इस ऐतिहासिक स्मारक का निमार्ण शाहजंहा के शासन काल में नारनौल के दिवान राय मुकन्द दास ने करवाया था। यह स्मारक नारनौल के मुगलकालीन ऐतिहासिक स्मारको में सबसे बड़ा है। भवन के भीतर से पानी की निकासी, फव्वारों की व्यवस्था तथा भूमिगत मंजिल में प्रकाश व पानी की निकासी व्यवस्था देखने योग्य है। इस पांच मंजिल के भवन का आकार चौकोर है जिसके बीच में बड़ा चौक है। भवन के विशाल शिलाओं वाले स्तम्भ, दरबार हाल तथा विशाल बरामदे और सीढियां व छत्तरियां भवन निमार्ण कला का अनूठा नमूना है। यद्यपि, इस समय अधिकांश छत्ता छतिग्रस्त हो चुका है और स्मारक जीर्णावस्था में है। बताया जाता है कि यह स्मारक सुरंग मार्ग से दिल्ली, जयपुर, महेन्द्रगढ तथा ढ़ोसी से जुड़ा हुआ है। जनश्रुति के अनुसार बहुत समय पहले एक बारात सुरंग देखने के लिए अन्दर घुसी थी परन्तु वह लौटकर नही आई। अकबर के शासनकाल में यहा बीरबल का आना जाना था, इसलिए इस स्मारक को बीरबल का छत्ता के नाम से जाना जाता है।
 
इब्राहिम खान का मकबरा
 
नारनौल शहर के दक्षिण में घनी आबादी के बीच स्थित इब्राहिम खान का मकबरा एक विशाल गुम्बद के आकार का है। इसका निमार्ण इतिहास प्रसिद्ध सम्राट शेरशाह सूरी ने अपने दादा इब्राहिम खान की यादगार में करवाया था। लोधी शासनकाल में इब्राहिम खान नारनौल के जागीरदार रहे थे। मकबरे के अन्दर इब्राहिम खान की कब्र है, जिस पर खानदान का निशान भी अंकित है। इसके पास दो छोटी कब्रे भी हैं। इब्राहिम खान के मकबरे के निमार्ण में लाल स्लेटी रंग के पत्थर का प्रयोग किया गया हैं, जिस पर मीनाकारी का कार्य बड़ी दक्षता से किया गया हैं। बड़ी-बड़ी शिलाओ वाला पत्थर इतना साफ और चिकना है कि अक्समात्‌ उसे देखकर संगमरमर होने का भ्रम होता हैं। यह स्मारक नारनौल के ऐतिहासिक स्मारको में सबसे अच्छी स्थिति में हैं।
 
चोर गुम्बद (साहुकार गुम्बद)
 
शहर की उत्तरी पश्चिमी दिशा में एक ऊंचाई वाले स्थान पर निर्मित ऐतिहासिक स्मारक चोर गुम्बद का निमार्ण जमाल खान नामक एक अफगान शासक ने अपनी ही समाधि-स्थल के रूप में करवाया था। यद्यपि यह यादगार के रूप में बनवाया गया था, परन्तु शहर के बाहर स्थित होने के कारण इस स्थल पर चोर उचक्के शरण लेने लगे थे, जिसके फल स्वरूप इसका नाम कालान्तर में चोर गुम्बद पड़ गया। यह एक विशाल गोलाकार गुम्बद है जिसकी छत को गोलाकार देकर बहुत उंचाई तक उठाया गया है। देखने में यह दो मंजिला लगता है, लेकिन इसकी उपरी मंजिल केवल बरामदा मात्र है जिसके 20 द्वार हैं। स्मारक की पश्चिमा दिशा को छोड कर शेष तीनों दिशाओं में एक-एक द्वार हैं।
 
मिर्जा अली जां की बावड़ी
 
 
नारनौल शहर को बावड़ियों व तालाबों का शहर कहा जाता हैं। यद्यपि शहर की बहुत प्राचीन बावडियों का अस्तित्व अब नही रहा हैं, परन्तु मिर्जा अली जां की बावड़ी आज भी विद्यमान है। यह नारनौल शहर के पश्चिम में आबादी से बाहर स्थित है। इस ऐतिहासिक बावड़ी का निमार्ण मिर्जा अली जां ने करवाया था। इसके निमार्ण के समय की सही जानाकारी नही मिलती। इस बावड़ी पर संगमरमर का एक बड़ा तखत रखा है, जिसके कारण इसे तखतवाली बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है। बावड़ी के पास ही एक कुआं है। बावड़ी में फव्वारा तथा नालियों द्वारा पानी पहुचाने की प्राचीन व्यवस्था देखने योग्य हैं। बावड़ी जीर्णावस्था में है। जिला प्रशासन ने इस बावड़ी की आंशिक मरम्मत का कार्य भी सम्पन्न करवाया है।
 
माधोगढ़ का किला
 
महेन्द्रगढ़ से 15 किमी. दूर सतनाली सडक मार्ग पर अरावली पर्वत श्रृंखला की पहाडियो के बीच सबसे ऊंची चोटी पर एक किला स्थित है। यह माधोगढ का ऐतिहासिक किला है। पर्वत की तलहटी में माधोगढ गावं बसा है। यद्यपि इस किले के निमार्ण के सम्बन्ध में कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नही है, परन्तु ऐसा माना जाता है कि इसका निमार्ण राजस्थान के सवाईमाधोपुर के शासक माधोसिंह ने करवाया था। इस समय यह किला अत्यन्त जीर्णावस्था में है। सम्भवतः किले के साथ पहाड के चारों और 52 बुर्जियां थी, जिनके कुछ अवशेष आज भी देखो जा सकते हैं। लगभग 800 वर्ग गज के क्षेत्र में फैले इस किले में 30 कोठरियां बनी हुई हैं। मुख्य किले से कुछ नीचे एक अन्य भवन है, जिसमें 12 कोठरियां हैं। गांव के लोग इसे रानी का महल के नाम से जानते हैं। किले से लगभग 150 मीटर नीचे एक तालाब है। इसी तालाब से किले में पानी की आवश्यकता की पूर्ति होती थी। ऐसी मान्यता है कि कालान्तर में इस किले का प्रयोग चोर ड़ाकुओं द्वारा किया जाता रहा हैं। इस वक्त यह स्थान एक खण्डहर ही प्रतीत होता हैं।
 
शाह विलायत का मकबरा
 
शाह विलायत का मकबरा इब्राहिम खान के मकबरे के एक ओर है । यह मकबरा आकार में बड़ा है और एक महाविद्यालय जैसा लगता है जिसमें तुगलक से लेकर ब्रिटिश काल तक की परम्परागत वास्तुकला को सजाया गया है । इसकी मौलिकता बाद में हुए निमार्ण कार्यों के कारण पूरी तरह नहीं रखी जा सकी है । फिरोज शाह तुगलक के काल में यह मकबरा और इसके निकट के स्थल बनाए गए थे । गुलजार के लेखक कहते है कि आलम खान मेवाड़ी ने इसका पूर्वी बरामदा और गुम्बद बनवाए और इसके निकट का भाग भी उन्होंने तैयार किया । इस मकबरे के पुराने भाग को देखकर हर कोई तुगलकिया वास्तुशिल्प की सराहना किए बिना नहीं रह सकता । तत्कालीन रीति-रिवाजों के अनुसार यहां मेहराबों का वक्राकार निमार्ण करवाया गया था । गोलार्घीय गुम्बद के कारण मकबरा स्वयं ही ऊपर हो गया है । गुम्बद का आन्तरिक भाग बिल्कुल चौरस है और इसमें कुछ चित्रकारी हुई है जो काफी देर बाद की है । इसकी दो चारदीवारियां मुगलकाल से ही थी, जबकि एक हिस्सा ब्रिटिश काल में बनाया गया ।
 
शाह कुली खान का मकबरा, बगीचा और त्रिपोलिया
 
आई-ने-अकबरी और लतीफ की यात्रा का सचित्र व्याख्यान हमें बताता है कि शाह कुली खान ने नारनौल में सुन्दर बाग और बड़े टैंक खुदवाए तथा शानदार इमारतें भी बनवायी थीं। बाद में उसने अपने लिए एक सुन्दर मकबरा बनवाया।

उसने एक सुन्दर बगीचा बनवाया और इसका नाम आराम-ए-कौसर रखा। जिसके आज केवल चार दीवारें, एक कुआं तथा मुख्य द्वार स्थल बचें है। सन्‌ 1578 में बने इस बगीचे के अन्दर इन दिनों कृषि की जाती है। यह छोटा जरूर है लेकिन एक शानदार स्मारक चिह्‌न है। यहां भूरे नीले और लाल पत्थरों से निर्मित है तथा अष्टाकार है जो पठानों के मकबरा बनाने का एक दूसरा तौर तरीका था। शाह कुली खान ने 1589 में अपने बाग में मुख्य द्वार पर त्रिपोलिया दरवाजा बनवाया था।

 
इस्लाम कुली खान का मकबरा
 
इस्लाम कुली खान अकबरी सेना में चार हजारी कमाण्डर था। यह मकबरा ईटों से बना हुआ है और इसका कोई विशेष महत्व नहीं है। सभी स्थानों के अतिरिक्त शोभा सागर तालाब, चामुण्डा देवी मन्दिर तथा महादेव शिव का मन्दिर आदि पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थल है। पुरातात्विक खुदाई के दौरान मस्जिद के नीचे एक जैन मन्दिर पाया गया, जिसका सीधा सा अर्थ है कि मुगल काल, विशेषतयाः औरंगजेब के शासन के दौरान जैन मन्दिर को मिट्‌टी के नीचे दबा दिया गया और उसके उपरी भाग पर मस्जिद बना दी गई थी ।
 
भगवान शिव मन्दिर (मोड़ावाला मन्दिर)
 
भगवान शिव का मन्दिर बस अड्‌ड़ा के समीप नारनौल रेवाड़ी मार्ग पर स्थित है। इस क्षेत्र का यह एक ऐसा मन्दिर है जहां हिन्दू परिवार का प्रत्येक सदस्य भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए आता हैं। रक्षा बन्धन के अवसर पर यहां एक बड़ा मेला लगता हैं।

इस मन्दिर का संक्षिप्त इतिहास है कि यहा कभी एक खेत था और उसमें एक आदमी को हल जोतते समय एक शिवलिंग दिखाई दिया। जब वह व्यक्ति सो रहा था तो उसने यह आवाज सुनी कि यहां भगवान शिव की स्थली है, लोगों के कल्याण के लिए यहा एक मन्दिर बनवाया जाए। इस प्रकार मन्दिर का निमार्ण किया गया और आज यह एक पूजा स्थली के रूप में प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र के लोगो को पूरा विश्वास है कि यहा पूजा करने वाले और मन्नत मांगने वाले की हर इच्छा पूरी होती हैं।                                                 Latest Updated on:- Oct.12,2017

 

 
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